Rajsthan
कुम्भश्याम का मन्दिर
कुम्भश्याम का मन्दिर सतबीस देवरी से एक छोटी सड़क दक्षिण-पश्चिम की ओर विजयस्तम्भ को ज…
गम्भीरी पुल दुर्ग को जाने वाले मार्ग पर हमें लगभग 566 फीट (172.5 मीटर) लम्बा पुल पार करना पड़ता है। यह “गम्भीरी पुल" कहलाता है जो बेड़च की सह…
Read moreचित्तौड़ - दुर्ग समुद्रतल से 590 मीटर (1810 फीट) ऊँचे तथा आसपास भूमि से 152 मीटर (500 फीट) ऊंचे उठे हुए एक पठार पर निर्मित है। इसकी लम्बाई लगभग साढ़…
Read moreमहाराणा उदयसिंह के बाद उनके पुत्र प्रतापसिंह (महाराणा प्रताप ) मेवाड़ की गद्दी पर बैठे। महाराणा प्रताप ने अपने कुल की मर्यादा को कायम रखा तथा जीवन प…
Read moreबनवीर को हराकर महाराणा उदयसिंह चित्तौड़ की गद्दी पर बैठे। उस समय भारत में मुगलों की ताकत बढ़ रही थी। बादशाह अकबर ने प्राय: सभी राजपूत शासको को अपने अ…
Read moreपन्ना धाय का त्याग महाराणा विक्रमदित्य ने चित्तौड़ का किला पुनः प्राप्त तो कर लिया किन्तु स्वभाव में कोई अन्तर नहीं आया, जिसके फलस्वरूप उसके चारों ओर…
Read moreमहाराणा रतनसिंह (द्वितीय) की मृत्यु के पश्चात राणा सांगा की हाड़ी रानी कर्मवती अपने दोंनो पुत्रों, विक्रमादित्य और उदयसिंह को लेकर कुम्भलगढ़ से चित्त…
Read moreमहाराणा सांगा का पूरा नाम संग्रामसिंह था । रायमल के बाद राणा सांगा सन् 1509 ई. में चित्तौड़ की गद्दी पर बैठे तथा अपने शौर्य से केवल मेवाड़ के ही नहीं…
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कुम्भश्याम का मन्दिर सतबीस देवरी से एक छोटी सड़क दक्षिण-पश्चिम की ओर विजयस्तम्भ को ज…
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